तुमने छुआ पर छुआ ही नहीं

तुमनें छुआ पर छुआ ही नहीं,
यह फासला कम हुआ ही नहीं।

तुम थे वही पर कही भी नहीं,
बाते हमारी यह झूठी नहीं।
 पल में पर तुम साथ नहीं,
हाथों में तेरा  हाथ नहीं।
यह फासला कम हुआ ही नहीं...

तुमनें सुना पर सुना ही नहीं,
यह फासला कम हुआ ही नहीं।

कहानी को तुमने पढ़ा ही नहीं,
किरदार हमारा रहा ही नहीं।
मिलने बुलाया पर आयी नहीं,
ज़ख्म दिया पर भरा ही नहीं।
यह फासला कम हुआ ही नहीं....

तुमनें कहा पर कहा ही नहीं,
यह फासला कम हुआ ही नहीं।

कसमें तुम्हारी टूट गयी ,
किस्मत हमारी रूठ गयी।
किसी और कि तुम तो हो ही गयी,
कहने को कुछ अब रहा ही नहीं।
यह फासला कम हुआ ही नहीं.....

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